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मुजफ्फरपुर SKMCH में मानवता शर्मसार! कफन के अभाव में पुराने चादरों से ढके जा रहे शव, इमरजेंसी की सीढ़ी के नीचे रखने का आरोप

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मुजफ्फरपुर के SKMCH में शवों की देखभाल को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि कफन उपलब्ध नहीं होने पर शवों को पुरानी चादरों से ढककर इमरजेंसी वार्ड की सीढ़ियों के नीचे रखा जा रहा है।

मुजफ्फरपुर/आलम की खबर:मुजफ्फरपुर स्थित Sri Krishna Medical College and Hospital (SKMCH) में शवों के रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल से सामने आई तस्वीरों और परिजनों के आरोपों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि अस्पताल में मृत मरीजों के लिए कफन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कई शवों को पुरानी बेडशीट या परिजनों द्वारा उपलब्ध कराई गई चादरों से ढककर औपचारिकता पूरी की जा रही है।

इतना ही नहीं, कुछ मामलों में शवों को स्ट्रेचर पर रखकर इमरजेंसी वार्ड की सीढ़ियों के नीचे छोड़ दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इस स्थिति ने अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृत व्यक्ति के सम्मान और गरिमा को मानवाधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सरकारी अस्पतालों में इलाज के साथ-साथ मरीजों की मृत्यु के बाद उनके पार्थिव शरीर की सम्मानजनक व्यवस्था की जिम्मेदारी भी अस्पताल प्रशासन की होती है। लेकिन SKMCH से सामने आए इस मामले ने इन व्यवस्थाओं की हकीकत पर बहस शुरू कर दी है।

चार घंटे तक सीढ़ी के नीचे पड़ा रहा शव

बताया जा रहा है कि पूर्वी चंपारण जिले के चौक बाजार निवासी संजय चौधरी की मौत इलाज के दौरान SKMCH में हुई थी। मौत के बाद शव को स्ट्रेचर पर रखा गया और आरोप है कि उसे इमरजेंसी वार्ड की सीढ़ियों के नीचे छोड़ दिया गया।

परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने शव को इस हालत में देखा तो खुद ही एक पुरानी बेडशीट से उसे ढक दिया। करीब चार घंटे तक शव वहीं पड़ा रहा। इस दौरान अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों की नजर भी उस पर पड़ती रही।

परिजनों के अनुसार शव वाहन मिलने में देरी के कारण यह स्थिति बनी। रात होने की वजह से समय पर अंतिम संस्कार भी नहीं हो सका और परिवार को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

इमरजेंसी वार्ड में रोजाना होती हैं कई मौतें

SKMCH के इमरजेंसी वार्ड में बड़ी संख्या में गंभीर मरीज पहुंचते हैं। अस्पताल सूत्रों के अनुसार यहां प्रतिदिन कई मरीजों की मौत भी होती है। चिकित्सकीय और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक शवों को कुछ समय के लिए अस्पताल परिसर में रखना पड़ता है।

लेकिन अगर शवों को रखने की उचित व्यवस्था नहीं हो तो यह मरीजों और उनके परिजनों के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। इमरजेंसी वार्ड में पहले से ही मरीजों की भीड़ रहती है। ऐसे में शवों के बीच से होकर लोगों का आना-जाना संक्रमण और असुविधा की स्थिति पैदा कर सकता है।

गर्मी और उमस के मौसम में लंबे समय तक शवों के खुले स्थान पर पड़े रहने से स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ सकते हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर ऐसी स्थिति को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई है।

कफन और शव वाहन व्यवस्था पर उठे सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल अस्पताल में कफन की उपलब्धता को लेकर है। आरोप है कि शवों को सम्मानजनक तरीके से ढकने के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं थी। इसके कारण पुराने कपड़ों या बेडशीट का सहारा लेना पड़ा।

वहीं शव वाहन को लेकर भी परिजनों ने शिकायत की है। उनका कहना है कि अस्पताल परिसर में समय पर शव वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया, जिसके कारण शव को लंबे समय तक अस्पताल में रखना पड़ा।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से पहले ही यह निर्देश दिया गया है कि अगर अस्पताल का शव वाहन उपलब्ध नहीं है तो वैकल्पिक व्यवस्था के तहत निजी एंबुलेंस की मदद से शव को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। हालांकि, आरोप है कि SKMCH में इस व्यवस्था का पूरी तरह पालन नहीं हो पा रहा है।

अस्पताल प्रशासन ने जांच की बात कही

SKMCH अधीक्षक डॉ. महेश प्रसाद ने इस मामले पर कहा कि उन्हें इस संबंध में पहले जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि स्टॉक खत्म होने या कमी होने की स्थिति में संबंधित सामग्री की मांग की जाती है। मामले की जानकारी मिलने के बाद अपने स्तर से जांच कराई जाएगी।

अस्पताल प्रशासन के इस बयान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या सामने आता है और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

व्यवस्था सुधारने की जरूरत

सरकारी अस्पतालों में गरीब और जरूरतमंद लोग बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में इलाज के बाद मृत्यु की स्थिति में भी सम्मानजनक व्यवस्था मिलना जरूरी है। शवों के लिए कफन, सुरक्षित स्थान और समय पर शव वाहन जैसी मूलभूत सुविधाएं स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा हैं।

SKMCH जैसे बड़े मेडिकल संस्थान में यदि ऐसी समस्या सामने आती है तो यह केवल एक अस्पताल की समस्या नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन जाती है। अब लोगों की नजर अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई और सुधारात्मक कदमों पर है।

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